Gyan Prakash Yojana

National President (Gyan Prakash Yojana 2018-20)

National Secretary (Gyan Prakash Yojana 2018-20)

इस योजना के माध्यम से कॉन्फ्रेंस चाहती है कि देश भर में आगम शास्त्रों का वितरण एवं स्वाध्याय की गतिविधियों को प्रोत्साहन करना, पक्खी प्रतिक्रमण में श्रावक-श्राविकाओं की रूचि जगाना। श्रावक को बारह व्रतों की जानकारी देकर युवकों एवं युवतियों में धर्म की रूचि बढ़ाना। भौतिक दौड़ एवं पश्चिमी संस्कृति की बढ़ती रूचि के बीच भावी पीढ़ी को देशकाल क्षेत्र भावानुसार जैन धर्म की शिक्षाओं का सार समझाना, शास्त्रों को सरल भाषा एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से सारभूत शिक्षाओं को ग्रहण करना ‘ज्ञान प्रकाश योजना’ का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
श्री ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस ने धार्मिक एवं सुकृत कार्यों के साथ ही परमार्थिक, सामाजिक कार्यों में सहभागी बनने का बीड़ा उठा लिया है। हॉल ही में हमारे परम पूजनीय साधु-साध्वी जी महाराज की शिक्षा के लिए (संस्कृत, प्राकृत, अंग्रेजी व अन्य भाषाएं) अध्यापक / अध्यापिकाओं की व्यवस्था कराने का दायित्व आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान् पारसजी मोदी जैन ने अपने सहयोगियों के साथ उठाया है। धन्य है, उनके ऐसे उच्च विचार एवं आदर भावना।
जैन स्कूलों में जैन धर्म का परिचयात्मक पाठ्यक्रम लागू कराके छात्रों में धर्म के प्रति लगाव पैदा कराना। मातृ संस्था के प्रत्येक कार्यक्रम पर श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन परम्परा की छाप डालने का भरपूर प्रयास कराना। सादा जीवन उच्च विचार के लक्ष्य को प्राप्त करना, जीवन का दर्पण पावन एवं पारदर्शी बनाकर समाज का वातावरण बदलने का प्रयास करना, इस योजना का लक्ष्य व आदर्श है। ज्ञान प्रकाश योजना इसमें कहां तक सफल होती है। यह समस्त सहयोगी महानुभावों के सहकार और स्नेह पर निर्भर करेगा। हमें यह प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए समस्त सहयोगियों से बड़ी अपेक्षा है।
सप्त कुव्यसन का पूर्ण त्याग जब तक हमारा बच्चा-बच्चा नहीं कर लेता है, तब तक ज्ञान प्रकाश योजना का यह अभियान चलता रहेगा।
‘व्यसन मुक्त हो सारा देश, ज्ञान प्रकाश का यही संदेश हम प्रत्येक जैन परिवार को ‘व्यसन मुक्त’ देखना चाहते है। यही हमारी योजना का आचरण शुद्धि-अभियान है। हमारा दूसरा अभियान ‘पंच अभिगम’ के पालन का आग्रह है। इस अभियान की महत्ता को स्वयं समझना और सभी को समझाना हमारा पावन कर्त्तव्य है। पंच अभिगम को अनुभूति में रमाएं बगैर पंच महाव्रत रूप आस्था के प्रति आदर उत्पन्न हो पाना असंभव है। नित्य प्रति सामायिक की शुद्ध साधना करना। श्रावक-श्राविकाएं अपने उपकरणों की पवित्रता और सादगी पर भी पूर्ण ध्यान दें। यह हमारा खास आग्रह है। सौम्य परिग्रह, प्रदर्शन मुक्त सामायिक साधना, इसी पर हमारा खास जोर है।
प्रतिक्रमण-सामायिक का शुद्ध पाठ एवं अर्थ सभी जाने ऐसा प्रयास, भोजना उतना ही लेना, जितनी रूचि हो। झूठा न छोड़कर, पापबंध से मुक्त रहने का आग्रह है। विशेषकर पर्व तिथि पर जमीकंद एवं रात्रि भोजन त्याग का प्रचार। इस योजना को सफल बनाकर आप अपना जीवन सफल बना सकते है।