Jeev Daya Yojana

National President (Jeev Daya Yojana 2018-20)

National Secretary (Jeev Daya Yojana 2018-20)

जीव दया योजना, हम में, अपने आप के जैन होने का गौरव जगाती है। जीव मात्र के प्रति भगवान महावीर का अहिंसा संदेश हम साकार कर सकते हैं। जीवदया को सामान्य रूप से गाय को कसाई से छुड़ाकर गौशाला में रख देना, कबूतर को दाना डालना अथवा बकरे को अमरिया करवा देना माना जाता है। यह तो श्रेष्ठ कार्य है ही, परन्तु यहां तक सीमित होकर संतोष कर लेना उचित नहीं है। जीवदया का अर्थ प्राणी मात्र को तनिक भी कष्ट न पहुंचे, उनकी रक्षा-सुरक्षा हो, अभय बनें, उसके लिए हमें वैचारिक क्रांति को प्रधानता देनी होगी।
शाकाहार प्रचार-प्रसार व व्यसन मुक्ति के स्टीकर, पोस्टर, सी.डी., साहित्य प्रचार-प्रसार के लिए रथनुमा वाहन एवं जीवदया फण्ड एकत्रित करके हम अनेकों ऐसे कार्य कर सकते है।
ऐसा करने से एक भी परिवार शाकाहारी बनें तो सैकड़ों जीवा को अभयदान स्वतः ही मिल जाएगा।
पशु मूक होते हैं, बोल नहीं सकते। वे अपने दुःख दर्द, भूख प्यास, बीमारी और अनेक कष्टों को व्यक्त नहीं कर सकते है। हम जीवदया योजना के अंतर्गत मूक प्राणियों के लिए अधि्क से अधिक सेवा कार्य कर सकते हैं। गौशालाओं को संचालित करने हेतु प्रबंधन में सहयोगी बन सकते हैं। गौशालाओं में चारे के लिए सहयोग व पंजीकृत गौशालाओं को अन्नदान दे सकते हैं। गौशालाओं को गोधन के लिए मुंहपका, खुरपका व मुंह में छाले की दवाई का निःशुल्क दवाई वितरण करवा सकते हैं। पशुओं के लिए स्वच्छ पानी के हौज बनवाने में सहयोग, जिन गौशालाओं में पशुओं के पीने के लिए पानी का अभाव है, वहां टयूबवैल, नलकूप आदि का बंधन करने में सहयोगी बनें। पशुओं को अभयदान देकर उनको संरक्षण उपलब्ध कराना, पशुओं, पक्षियों के प्रति होने वाले अत्याचार, क्रूरता और अन्याय के विरुद्ध वैचारिक वातावरण बनाना।
नई गौशाला खोलने और वर्षों पुरानी गौशालाओं को संचालन में सहयोग कर सकते हैं। आवश्यकता, कबूतर खानों को दवाई व दाने हेतु सहयोग करना, चबूतरे बनवाना, पशु-पक्षी चिकित्साल्य खुलनवा, बीमार पक्षियों, घायल पशुओं के लिए ईलाज के लिए मदद करना, कुत्तों को रोटी डालना, पशु रक्षा करना एवं जीवदया के संकल्प पत्र भरवाने जैसे कार्य कर सकते हैं। जैन कॉन्फ्रेंस की जीवदया योजना के तहत यथा योग्य राशि उपलब्ध कराई जाती है।
जैन धर्म में वर्णित गुप्तदान एवं जीवदया के महत्व को समझें, स्वीकार करें। शास्त्रों में वर्णित भावना के अनुसार अहिंसा धर्म का आधार ही करुणा, कृपा भाव और अनुकम्पायुक्त मंगल मांगल्य है। आप स्थान-स्थान पर जैन कॉन्फ्रेंस के बैनर तले जीव दया की गतिविधियों को प्रोत्साहित करके योजना को सार्थक करें। इस अभियान में पुरुषार्थ एवं परिश्रम से कमाया धन उदारमना होकर दान दें और अपना लोक लोकांतर सफल बनाएं, अपना सहयोग भरा हाथ बढ़ाएं।
जैन कॉन्फ्रेंस की इस गौरवशाली योजना में आधार स्तम्भ बनने के लिए रुपये 51,000/- प्रमुख आधार बनने के लिए रुपये 1,01,000/- तथा संरक्षक बनने के लिए रुपये 2,51,000 दा दान दे सकते हैं। हम ऐसे दानदाताओं का परिचय हमारी लोकप्रिय पत्रिका जैन प्रकाश में फोटो सहित प्रकाशित भी करते हैं।