जैन भवन में श्रमण संघीय साधु-साध्वियों के पावन सान्निध्य में अमृत महोत्सव धर्म जागरण समारोह सम्पन्न
रविवार, दिनांक 12 जुलाई को जैन भवन में उपाध्याय प्रवर पू. श्री रवीन्द्र मुनि जी महाराज एवं महाश्रमण उप-प्रवर्तक पू. श्री आनंदमुनि जी म. आदि ठाणा, कठोर अभिग्रहधारी पू. श्री राजेशमुनि जी म. आदि ठाणा एवं पंजाब वीरांगना महासाध्वी पू. श्री किरण जी म. आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में 'श्रमण संघीय अमृत महोत्सव धर्म जागरण समारोह' श्रद्धा, उत्साह एवं आध्यात्मिक वातावरण के मध्य सम्पन्न हुआ। समारोह का उद्देश्य अमृत महोत्सव वर्ष को केवल आयोजनों तक सीमित न रखते हुए उसे धर्म, सेवा, संस्कार एवं संगठन के व्यापक जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करना था।
इस अवसर पर अमृत महोत्सव वर्ष के दौरान देशभर में आयोजित किए जाने वाले विविध धार्मिक, सामाजिक, सेवा, संस्कार, महिला, युवा, शोध, प्रकाशन एवं जनजागरण कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा समाज के समक्ष प्रस्तुत की गई। वर्षभर संचालित होने वाले प्रत्येक कार्यक्रम के उद्देश्य, स्वरूप एवं समाज की सहभागिता पर विस्तार से चर्चा करते हुए सभी से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया गया।
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पूज्य उपाध्याय श्री रवीन्द्र मुनि जी महाराज ने अपने प्रेरक उद्बोधन में धर्म को जीवन का आवरण बनाने,
संगठन की एकता को सुदृढ़ करने तथा सेवा एवं संस्कारों को समाज की जीवनशैली बनाने का संदेश प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि अमृत महोत्सव तभी सार्थक होगा जब उसका प्रत्येक कार्यक्रम समाज में स्थायी सकारात्मक
परिवर्तन का आधार बने।
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समारोह के अंत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अमृत महोत्सव वर्ष के प्रत्येक कार्यक्रम को सफल बनाने, समाज के अधिकाधिक परिवारों को जोड़ने तथा श्रमण संस्कृति के शाश्वत संदेश-अहिंसा, संयम, सेवा और समरसता-को जन-जन तक पहुँचाने का सामूहिक संकल्प लिया। श्रद्धा, उत्साह और नवसंकल्प से परिपूर्ण यह धर्म जागरण समारोह अमृत महोत्सव वर्ष की राष्ट्रीय गतिविधियों के लिए एक प्रेरणादायी आधार सिद्ध हुआ।