निःशुल्क नेत्र शिविर व सर्जरी
'परस्परोपग्रहो जीवनाम्' जैन दर्शन के इसी शाश्वत और मानवतावादी सिद्धांत को चरितार्थ करते हुए, श्री ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस, नई दिल्ली द्वारा एक अत्यंत सराहनीय और कल्याणकारी कदम उठाया जा रहा है। श्री वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के 75वें स्थापना दिवस 'अमृत महोत्सव' के पावन अवसर पर समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्ग के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए निःशुल्क नेत्र जाँच शिविर एवं 75 निःशुल्क नेत्र शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) का संकल्प लिया गया है
नेत्र ज्योति की दिशा में ऐतिहासिक पहल
अमृत महोत्सव वर्ष में निःशुल्क नेत्र शिविर व सर्जरी का संकल्प
'परस्परोपग्रहो जीवनाम्' जैन दर्शन के इसी शाश्वत और मानवतावादी सिद्धांत को चरितार्थ करते हुए, श्री ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस, नई दिल्ली द्वारा एक अत्यंत सराहनीय और कल्याणकारी कदम उठाया जा रहा है। श्री वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के 75वें स्थापना दिवस 'अमृत महोत्सव' के पावन अवसर पर समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्ग के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए निःशुल्क नेत्र जाँच शिविर एवं 75 निःशुल्क नेत्र शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) का संकल्प लिया गया है.
प्रस्तावित आयोजन: दीपावली पर्व के पश्चात विशाल निःशुल्क नेत्र जाँच शिविर का आयोजन होना है, जिसमें जरूरतमंद 75 नेत्र रोगियों के निःशुल्क ऑपरेशन की पूर्ण व्यवस्था की जाएगी। सेवा, समर्पण और जन-कल्याण का संगम, धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व का यह अनूठा संगम केवल एक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक रोशनी पहुँचाने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। जैन स्थानक, पश्चिम विहार द्वारा संचालित धर्मार्थ चिकित्सा केंद्र में इस महाअभियान का शुभारंभ किया जाएगा। यहाँ अनुभवी नेत्र विशेषज्ञों द्वारा मरीजों की जांच की जाएगी और मोतियाबिंद या अन्य नेत्र विकारों से पीड़ित 75 चिन्हित मरीजों के ऑपरेशन की पूरी जिम्मेदारी संस्था द्वारा उठाई जाएगी.
जैन दर्शन का जीवंत उदाहरण: यह पहल सिद्ध करती है कि धार्मिक अनुष्ठान जब सेवा कार्यों से जुड़ जाते हैं, तो वे समाज में वास्तविक परिवर्तन लाते हैं। जैन कॉन्फ्रेंस की यह व्यापक जन-कल्याणकारी पहल न केवल नेत्र ज्योतिहीन जीवन मे उजाला भरेगी, बल्कि समाज में भाईचारे, करुणा और परोपकार की भावना को भी सुदृढ़ करेगी। दूसरो के जीवन को सुखी बनाना और उनके कष्टों को दूर करना ही सबसे बड़ा धर्म है।